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रविशंकर रवि: पूर्वोत्तर की पत्रकारिता का संजीदा चेहरा

पूर्वोत्तर भारत की हिंदी पत्रकारिता में अगर किसी नाम को विशेष रूप से याद किया जाता है, तो वह हैं रविशंकर रवि । पिछले तीन दशकों से अधिक समय से इस क्षेत्र की समस्याओं, संस्कृति और संघर्षों को राष्ट्रीय मंच पर लाने वाले रवि एक समर्पित और संवेदनशील पत्रकार हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत 1986 में नवभारत टाइम्स, पटना से की, लेकिन जल्द ही पूर्वोत्तर की ओर रुख किया।

उन्होंने आउटलुक, दैनिक हिंदुस्तान, जनसत्ता, अमर उजाला जैसे प्रमुख पत्रों में लेखन किया और दूरदर्शन-डीडी न्यूज के लिए कई कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। उनकी यात्रा आधारित पुस्तक “लाल नदी, नीले पहाड़”को केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा हिंदी शिक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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रवि ने असम, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में गहराई से रिपोर्टिंग की। वे कुकी-नागा संघर्ष, बोडो आंदोलन और उग्रवादी गतिविधियों जैसे जटिल विषयों को हिंदी पाठकों के सामने लाने में सफल रहे। उनकी लेखनी केवल खबर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संवेदनाओं की सजीव अभिव्यक्ति रही है।

रविशंकर रवि वर्तमान में हिंदी दैनिक 'पूर्वोत्तर' के संपादक हैं और नए पत्रकारों को दिशा देने में भी सक्रिय हैं। वे अनुवाद कार्य में भी रुचि रखते हैं और पूर्वोत्तर भारत की बहुभाषी संस्कृति को हिंदी पाठकों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। रवि का परिचय केवल एक पत्रकार के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर और हिंदी जगत के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में है।

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