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ब्रह्मपुत्र के किनारे ज़िंदगी की नई पहचान

मेरे 63वें वसंत की दहलीज़ पर एक आत्मावलोकन आज जब ज़िंदगी के 63वें पड़ाव पर क़दम रख रहा हूँ, तो भीतर एक आत्मीय पुलक है। बीते वर्षों की स्मृतियाँ…

भगदत्तपुर से प्रागज्योतिषपुर : एक पौराणिक यात्रा का आधुनिक पड़ाव

भा गलपुर से गुवाहाटी की यह यात्रा मेरे लिए केवल एक भौगोलिक दूरी तय करना भर नहीं थी, यह इतिहास और पुराकथाओं के गलियारों से गुजरने का अनुभव थी। जब…

रंगपुरुष रतन थियम को नमन

र तन थियम एक कलाकार नहीं, एक सांस्कृतिक आंदोलन थे। वे मंच पर सिर्फ नाटक नहीं रचते थे, बल्कि सभ्यता, समाज और मानवीय चेतना की पुनर्रचना करते थे। भारतीय रंगमंच…

नुब्रा घाटी से पैंगोंग तक – एक अविस्मरणीय हिमालयी यात्रा

सुबह की शुरुआत: हुन्दर से विदा लद्दाख की नुब्रा घाटी के प्रसिद्ध हुन्दर गांव में ठंडी सुबह की हवा के साथ हमारी पैंगोंग झील की ओर यात्रा शुरू हुई। यह…

पैंगोंग लेक : प्रकृति की अद्भुत नक्काशी

लद्दाख की भूमि अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, विशाल पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है, परंतु जब आप पैंगोंग झील के किनारे खड़े होते हैं, तो लगता है…